Thursday, August 15, 2013

नारी एक शक्ति हैं


नारी   जीवन की विवशताए  और  सामाजिक  नियमों   का  उनके   प्रति   उतना  खुला   रुख  न होना  समस्याओ  को  और  भी बढ़ा  देता   हैं .यूँ  भी  जिस किसी काल मे  यह   नियम  बनाये   गए  होने  उस  काल की परिस्थितियाँ और मानसिक  अवस्था  कम से कम आज जैसी   तो न रही  होगी  उस काल के मनस्वियों का  का चिंतन  अपने  आप मे   उच्चता  का परिचायक  रहा .

यहाँ तक  वेद जैसे  ग्रथो  के मर्म  को जानने  वाली   अनेको उच्चस्तरीय   नारी शक्तियों  के बारे मे  हम भली भांति जानते हैं ही .सिर्फ यह  कहने  से  ही  तो  काम नही चल  सकता   की नारी  एक शक्ति  हैं बल्कि उसे भी   अपने  गुणों को, आपने  आप को और  अपनी शक्तियों   को भली भांति  जानना ही    होगा .तभी  जो कहा  गया हैं वह वास्तविक  रूप  मे  सामने  आ पायेगा .

और यह संभव हो सकता हैं  केबल  और केबल   साधना   के माध्यम से ..और कोई  मार्ग अब कम से कम शेष नही  रहा ...यहाँ  तक   भगवान  शंकर   ने भी इस काल मे  आने  वाले परिवर्तन  और मानसिक अवस्थाये  और    विभिन्न  कमियों  को  देख कर पहले  ही कह दिया हैं की केबल और केबल  तंत्र   मार्ग   ही  इस काल मे  सफलता दायक हैं  जो इसे छोड़कर   दूसरे मार्ग का  अब्लंबन लेता हैं उसके  भाग्य  को  क्या कहा जाए .

केबल किसी बात का जान कार होने  के  कई कई  गुना   जयादा  बेहतर   होगा  की  उस मार्ग पर चल कर देख जाए .पर यह भी सत्य हैंकि  कितनी  भी  प्रगति  क्यों न  आज समाज मे  दिख रही  हो पर   अभी   भी अनेको का  चेतना का  स्तर उतना  ही  दकियानुसी हैं , उनका   बाह्य्गत  एक  रूप  हैं और घर के  अंदर  एक अन्य रूप .कतिपय  परिवार  मे  तो   नारी  वर्ग की   अवस्था  अभी भी  बहुत  अच्छी नही  कहीं   जा  सकती हैं .

वही  जब  एक लड़की अन्य परिवार मे  प्रवेश करती   हैं   तो  कुछ  दिन  बाद  वही समस्याए   उनके  सामने  आने  लगती  हैं  केबल   उनका  रूप   और आकार  और व्यक्ति  बदल जाता   हैं .

कारण कोई भी  हो उन्हें  ही  दोषी  ठहराया  जाता हैं .सभी  को  एक दृष्टी  से  देखना भी  गलत   हैं . खेर अगर आपके  परिवर मे   आपके   सास ससुर अनुकूल न   रहे  हो  तो  इस  प्रयोग  को  करके  देखें .निश्चय  ही  अनुकूलता  आएगी ..उनके मन मे  आपके  प्रति   कोमल भावना  का  आगमन  होगा ही .

वहीँ आपका  भी कर्तव्य बनता हैं की   गृह  लक्ष्मी  होने के का रण आप भी लक्ष्मी सबंधित साधनाए    हमेशा करती जाए .क्योंकि  धन की कमी  के कारण अनेको  ऐसी  समस्याए  आती हैं जिनका  सच मे  सीधे  कोई  अस्तित्व नही होता   हैं  तो  इस कारण यदि कुछ  आप न कर पा   रही  हो  तो   कनक धारा  स्त्रोत  और  सौभग्य  कारक  किसी भी स्त्रोत का पाठ   को अपनी दैनिक  पूजा मे  अंग  तो बनाये .
हम यह भी  जानते हैं की कई बार   आप  साधना   करना चाहती  हैं पर   किसी का रण वश  या तो यन्त्र   नही  या  फिर   साधना   का उचित ज्ञान नही होता इसी कारण  हमने   साधनाओ का प्रावधान   रखा हैं की यन्त्र  आपको  प्राप्त कर सकती हैं .. और  सबंधित  साधना भी .
जो    कर सकने मे  समर्थ हो  वह तो  इन साधनाओ को  करते  जाए  और   साधना त्मक  उर्जा  से  निश्चय  ही आपके व्यक्तित्वमे परिवर्तन आएगा  वहीँ  जब  शक्ति तत्व  जाग्रत  होगा तो   स्वतः ही सभी आपके  आकर्षण मे बंधते  जायेगे  ही .
पर यह  एक  दिन मे   तो नही  होगा  धीरे  धीरे  आप परिवर्तन के लिए  तैयार  हो   फिर  देखिये   साधनाए कैसे  आपके  जीवन  को उच्चता  की  ओर  ले  जाती हैं .
किसी भी शनि वार को इस यन्त्र को आप   गेहूं की रोटी पर बना ले  और  किसी भी काले रंग  के कुत्ते और कुतिया   को खिला  दे इससे   निश्चय  ही अनुकूलता  आएगी (वेसे  भी   गेहूं की रोटी  मे  तेल भी चुपड़  कर किसी भी काले  कुत्ते   को खिलाने  से  घर परिवार  मे  व्याप्त तनाव   मे कमी आती हैं   यह भी अनेको  का परीक्षित  प्रयोग  हैं ) 
वेसे यह जान ले  जिस  दिन   भी आप यह करना  चाहोगे  उस  दिन कहीं आपको  यह काले  रंग के  स्वान  दिखेंगे  ही नही  और  दिख गए  तो   तो ये  खायेंगे  ही  नही..ऐसा  अनेक बार  होता हैं   यही तंत्र जगत के कुछ अद्भुताये  हैं  .
 आप सभी के परिवार मे  अनुकूलता  आये  हर  तरह से   सुखी सम्पन्नता   देख सके  यही  कामना   के साथ ..पर उन्हें भी यह ध्यान रखना होगा की  उन्हें   भी सदैव  एक  योग्य साधनामय बनना   हैं . यह  संभव नही  हैं  की एक प्रयोग कर लिया   और जीवन भर के लिए   मुक्ति .. ....




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Saturday, May 25, 2013

गर्मी के दिनों एक आम समस्या होती है लू लगना।

 वैसे तो प्याज भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है लेकिन क्या जानते हैं प्याज बिना खाए भी चमत्कारी फल प्रदान करता है। जी हां यहां प्याज का एक ऐसा उपाय बताया जा रहा है जिससे आपको बहुत ही जल्द चमत्कारी फल प्राप्त होने लगेंगे।इन दिनों गर्मी का प्रकोप काफी बढ़ गया है। अत्यधिक गर्मी के कारण स्वास्थ्य बिगडऩे का खतरा हर पल बना रहा रहता है। यदि दोपहर के समय घर से बाहर जाना पड़े तो धूप के कारण निश्चित ही बीमार होने की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। गर्मी के दिनों एक आम समस्या होती है लू लगना। यदि किसी व्यक्ति को लू लग जाती है तो उसे कई प्रकार स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों को सहन करना पड़ता है। यहां जानिए कुछ ऐसे उपाय जिनसे लू से बचा सकता है। लू लगने का अर्थ: जब कोई व्यक्ति अत्यधिक गर्मी में घर से बाहर धूप में घुमता है तो वह गर्म हवाओं के प्रभाव में आ जाता है। इसे ही लू लगना कहते हैं। गर्म हवाओं के प्रभाव में आने से शरीर में ऐंठन होती है, खून का दबाव भी काफी बढ़ जाता है, शरीर से पसीने के रूप से नमक और पानी की काफी निकल जाती है। तेज बुखार भी हो सकता है। सिर में भारीपन महसूस होता है और हाथ-पैरों में जलन महसूस होती है। आंखों में भी जलन होती है। यदि समय रहते लू का इलाज न किया जाए तो यह बीमारी विकराल रूप भी ले सकती है। लू से बचने से लिए तेज धूप में घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। यदि कहीं बाहर जाना बहुत जरूरी हो तो एक प्याज अपनी जेब में रखकर घर से बाहर निकलें। लू से बचने का यह उपाय काफी पुराने समय से चला आ रहा है और इस कारगर भी है। प्याज का जेब में रखने से पहले उसके ऊपर का छिलका उतार लेना चाहिए। इसके बाद इसे अपनी जेब में रख लें। इसके प्रभाव से गर्म हवाओं का आपके शरीर पर बुरा असर नहीं पड़ेगा। प्याज आपके शरीर तक आने वाली नुकसानदायक हवा के दुष्प्रभाव को निष्क्रीय कर देगा और आपकी रक्षा हो जाएगी। जब कोई व्यक्ति गर्मी के दिनों ज्यादा समय तक भूखा रहता है और फिर तेज धूप में घुमता है तो उसे लू लगने की संभावनाएं काफी अधिक रहती हैं। इस बात का भी विशेष ध्यान रखें कि तेज धूप से लौटकर तुरंत ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। अन्यथा आपके स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है। लू लगने पर किसी छायादार स्थान पर लेट जाना चाहिए। इसके साथ ही प्राथमिक उपचार के लिए किसी डॉक्टर से परामर्श किया जाना बहुत जरूरी है। गर्मी के दिनों में ऐसे कपड़े पहनना चाहिए जो शरीर से निकलने वाले पसीने को सोख लें। सूती वस्त्र का उपयोग सबसे अधिक फायदेमंद रहता है। लू लगने पर अधिक ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए। मटके के पानी का सेवन करें। लू लगने पर कैरी का पना पीना काफी राहत देता है। इसके साथ पीडि़त व्यक्ति को प्याज के रस में शहद मिलाकर देना चाहिए। थोड़ी-थोड़ी देर रोगी व्यक्ति के शरीर को साफ से भीगे हुए टॉवेल से पोंछते रहना चाहिए।



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Tuesday, March 19, 2013

एक शब्द सुनते आ रहे हैं- नजर लगना



हम बचपन से ही एक शब्द सुनते आ रहे हैं- नजर लगना। ऐसी मान्यता है कि यदि किसी बच्चे को नजर लग जाए तो उसकी तबियत खराब हो जाती है या फिर वह थोड़ा अनमना सा हो जाता है। कुछ लोग नजर लगने को सिर्फ एक वहम मानते हैं। जबकि नजर लगना कोई मन का वहम नहीं बल्कि एक वैज्ञानिक क्रिया है। विज्ञान के अनुसार शरीर में विद्युत तरंगें होती है। इन विद्युत तरंगों से किसी प्रकार से बाधित होने पर शरीर लकवे का शिकार हो जाता है अत: शरीर की विद्युतीय तरंगता से नजर लगने का सीधा संबंध है। - बड़ों की तुलना में बच्चों को अधिक नजर लगती है क्योंकि बच्चों का शरीर कोमल होता है तथा उनके शरीर में विद्युतीय क्षमता बड़ों की तुलना में कम होती है। यदि कोई बच्चों को एकटक देखता रहता है तो उसकी नजरों की ऊर्जा बच्चे की ऊर्जा को प्रभावित करती है जिसके कारण बच्चा अनमना या बीमार हो जाता है। - बुरी नजर से बचने के लिए ही बच्चों को काला टीका लगाया जाता है या काला धागा पहनाया जाता है। इसका भी वैज्ञानिक कारण है। विज्ञान यह मानता है कि काला रंग ऊष्मा का अवशोषक है। अत: जब बच्चे को काला टीका या काला धागा बांधा जाता है तो वह किसी भी प्रकार की ऊष्मा (बुरी नजर) को बच्चों में प्रवेश नहीं करने देता तथा स्वयं ही अवशोषित कर लेता है। इसी वजह से बच्चों को नजर नहीं लगती।

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