Sunday, August 12, 2012

भगवान शिव को जलधारा अतिप्रिय है

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भगवान शिव को जलधारा अतिप्रिय है, ऐसा माना जाता है। इसीलिए शास्त्रों में बताया गया है कि जल व पंचामृतधारा से शिवजी का अभिषेक करने पर शिवजी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। अभिषेक करते समय ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद में दिये गए मंत्र बोले जाते हैं। लोग ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करते हैं।
जल में दूध मिला कर अथवा केवल दूध से भी शिवजी का अभिषेक किया जाता है। भोलेनाथ की विशेष पूजा में दूध, दही, घृत, शहद और चीनी से अलग-अलग अथवा सब को मिला कर पंचामृत से भी अभिषेक किया जाता है। लेकिन हर धारा से अभिषेक का अलग और खास फल प्राप्त होता है। इसीलिए अलग-अलग वस्तुओं की धारा से शिवजी का अभिषेक किया जाता है।
कहते हैं भगवान शिव को दूध की धारा से अभिषेक करने से मूर्ख भी बुद्धिमान हो जाता है, घर की कलह शांत होती है।
जल की धारा: जल की धारा से अभिषेक करने से विभिन्न कामनाओं की पूर्ति होती है
घृत यानी घी की धारा से अभिषेक करने से वंश का विस्तार, रोगों का नाश तथा जिन पुरुषों को नपुंसकता की परेशानी है वह भी शिवलिंग पर घी चढ़ाने से दूर होती है। इस उपाय के साथ ही डॉक्टर द्वारा बताई गई आवश्यक दवाइयों भी नियमित रूप से लेते रहना चाहिए।
शिवलिंग पर इत्र की धारा से अभिषेक करने वाले भक्त को सभी भोग और सुख प्राप्त होते हैं
शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से भक्त को टीबी जैसे भयानक रोग होने की संभावनाएं समाप्त हो जाती हैं।
गन्ना या ईख चढ़ाने से श्रद्धालु को सुख और आनंद की प्राप्ति होती है
गंगाजल से सभी भोग एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसीलिए माना जाता है कि शिव पूजन से सारे सुखों की प्राप्ति के लिए इन छ: चीजों से शिवजी का अभिषेक जरूर करना चाहिए।

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