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Saturday, June 16, 2012

परमात्मा किसी भी कंगाल व्यक्ति को राजा बना सकते हैं

ऐसा माना जाता है कि अमीर होना या गरीब होना भाग्य पर निर्भर करता है। अमीर-गरीब होने की बात पर आचार्य चाणक्य ने बताया है कि-

रङ्कं करोति राजानं राजानं रङ्कंमेव च।

धनिनं निर्धनं चैव निर्धनं धनिनं विधि:।।

इस श्लोक का अर्थ है- परमात्मा किसी भी कंगाल व्यक्ति को राजा बना सकते हैं और किसी भी राजा को कंगाल। धनी व्यक्ति को निर्धन और निर्धन को धनी बनाने का सामर्थ्य भगवान के पास ही है।

आचार्य चाणक्य ने बताया है कि केवल विधाता ही व्यक्ति का भाग्य बदल सकते हैं। इंसान के जैसे-जैसे कर्म होते जाते हैं, ईश्वर उसे वैसे फल प्रदान करते हैं। यदि किसी व्यक्ति के कार्य अच्छे हैं तो वह भगवान से शुभ फल प्राप्त करता है और बुरे कर्म होने पर परेशानियां झेलता है। परमात्मा की परंपरा है कि वे राजा को रंक और रंक को राजा बनाते रहते हैं। भगवान इंसान की परीक्षा लेते हैं और इस परीक्षा के आधार पर धनी को गरीब और गरीब को धनी बना देते हैं।